भारतवर्ष प्रधानतः गांवों का देश है। यहाँ की दो-तिहाई से अधिक जनसँख्या गांवों में रहती है। आधे से अधिक लोगों का जीवन खेती पर निर्भर है। इसलिए गांवों के विकास के बिना देश का विकास किया जा सकता है, ऐसा सोंचा भी नहीं जा सकता। गांधी जी ने कहा था- ‘असली भारत गांवों में बसता है’। भारतीय ग्राम्य-जीवन सादगी और प्राकृतिक शोभा का भण्डार है। भारतीय गांव के निवासियों का आय का मुख्य साधन कृषि है। कुछ लोग पशु-पालन और कुछ कुटीर उद्योग से अपनी जीविका कमाते हैँ। कठोर परिश्रम, सरल स्वभाव और उदार हृदय ग्रामीण जीवन की विशेषताएं हैं। भारतीय किसान सुबह से शाम तक खेतों मेँ कड़ी मेहनत करते हैँ। गांव की प्राकृतिक छटा मन मोह लेती है। दूर-दूर तक लहलहाते हुए हरे-भरे खेत और चारों तरफ रंग-बिरंगे फूल और उनकी फैली हुई ख़ुशबू मदहोश कर देती है। चारों तरफ चहचहाते हुए पक्षी मन मोह लेते हैं। सादगी और प्राकृतिक शोभा के भण्डार इन भारतीय गांवों की भी अपनी कथा है।
Gaav ki khani
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